कोरोना संकट- 75 करोड़ लोगों को राहत देने के लिए केंद्र ने राज्यों को दी ये छूट

By Abhishek Raghuvanshi
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केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राशन की दुकानों के माध्यम से वितरण होने वाले अनाज (Food grains) को लेकर बड़ी छूट देने का ऐलान किया है. राज्य अब FCI से एक साथ 3 महीने का अनाज उधार पर उठा सकते है.

केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राशन की दुकानों के माध्यम से वितरण होने वाले अनाज (Food grains) को लेकर बड़ी छूट देने का ऐलान किया है. राज्य अब FCI से एक साथ 3 महीने का अनाज उधार पर उठा सकते है.

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus, COVID-19) महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राशन की दुकानों के माध्यम से वितरण होने वाले अनाज को लेकर बड़ी छूट देने का ऐलान किया है. राज्य अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) से एक साथ तीन महीने का अनाज उधार पर उठा सकते है. ऐसा  किया गया है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लगभग 75 करोड़ लाभार्थी आते हैं.

भारत के पाास कितना अनाज है- सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल सरकार के पास 435 लाख टन खाद्यान्न भंडार हैं, जिनमें से 272.19 लाख टन चावल और 162.79 लाख टन गेहूं है.

मौजूदा समय में, सरकार देश में पांच लाख राशन की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह पांच किलोग्राम सब्सिडी वाले खाद्यान्न की आपूर्ति करती है. इससे सरकारी खजाने पर सालाना लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये का खर्च बोझ आता है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट के जरिए बताया है कि जनता को खाद्यान्न की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता मुहैया कराने के लिए ये कदम उठाया गया है. अब FCI से तीन महीने के लिए खाद्यान्न उधारी पर राज्यों या संघ शासित प्रदेशों द्वारा उठाए जा सकते हैं.वित्त मंत्री ने बताया कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की अवधि के दौरान वित्त मंत्रालय सरकार की व्यय प्रणाली के सुचारू रूप से काम करना सुनिश्चित करेगा. इसे अनिवार्य सेवा के दायरे में लाने की घोषणा कर दी गई है.

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इसलिए सरकार की ओर से किए जाने वाले विभिन्न तरह के भुगतान से जुड़े सभी कार्यालय खुले रहेंगे ताकि पैसे के लेनदेन में किसी तरह की देरी ना हो.

मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि सरकार की व्यय प्रणाली से जुड़े सामान्य और मंत्रालयों के एकीकृत वित्त प्रखंड (आईएफडी), लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के विभाग और कार्यालयों की सेवाएं अब अनिवार्य सेवाओं की श्रेणी में होंगी.

वित्त मंत्रालय ने सरकारी व्यय प्रणाली को अनिवार्य सेवा घोषित कर दिया है. सरकार की ओर से किए जाने वाले सभी तरह के भुगतानों को सामान्य गति से चलाने और पैसों के लेनदेन में देरी को रोकना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इसे अनिवार्य सेवा के दायरे में ले लिया है.

वित्त मंत्रालय ने एक सूचना में कहा कि सरकार की भुगतान प्रणाली से जुड़े सभी कार्यालय कोरोना वायरस संकट की अवधि के दौरान खुले रहेंगे.

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First published: March 24, 2020, 10:46 AM IST

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