सुबह रिपाेर्ट निगेटिव आई, दाेपहर में आइसाेलेशन वार्ड का चार्ज संभाला

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर 12 मई 2020

धार. काेराेना के खिलाफ इस जंग में स्टाफ नर्सें भी ढाल बनकर खड़ी हैं। नर्स-डे पर आज ऐसी ही कर्मठ नर्साें से मिलवा रहे हैं, जिन्हाेंने समर्पण की नई मिसाल कायम की है। किसी ने रिपाेर्ट निगेटिव आने के कुछ घंटाें बाद ही अाइसाेलेशन वार्ड का चार्ज संभाल लिया, ताे काेई काेराेना पाॅजिटिव बच्चाें काे जेब से नाश्ता करा रही है। एसएनसीयू वार्ड की नर्साें के क्वारेंटाइन रहने तक पीआईसीयू की वार्ड की 11 नर्साें ने बगैर किसी छुट्टी के 12-12 घंटे ड्यूूटी कर नवजात शिशुओं काे संभाला है।  

घर पर वीडियाे काॅल से बात करती हैं
एसएनसीयू वार्ड की स्टाफ नर्स रिचा चाैधरी की रिपाेर्ट पाॅजिटिव आने के बाद जिला अस्पताल की नर्साें की सैंपलिंग हुई थी। उनमें 31 वर्षीय श्वेता चाैहान भी थीं। 17 अप्रैल काे सैंपल जाते ही श्वेता 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन हाे गई थीं। 22 अप्रैल की सुबह उनकी रिपाेर्ट निगेटिव आई थी। दाेपहर में आइसाेलेशन वार्ड का चार्ज संभाल लिया तब से वे आइसाेलेशन सेंटर में ही ड्यूटी दे रही हैं। परिवार खतरे में नहीं अाए इसलिए घर जाने की बजाए हाेटल में रह रही हैं। मां रेखा चाैहान, भाई राघव, बहन हर्षिलता व साक्षी से वीडियाे काॅल पर बात करती हैं। 

मनीषा बच्चाें काे चाय, नाश्ता अपनी जेब से कराती हैं
मनीषा हिलाल के पास अाइसाेलेशन सेंटर की व्यवस्था संभालने का काम है। स्क्रीनिंग से लेकर सैंपल भेजने तक की व्यवस्था उनके जिम्मे है। जब तक सैंपल इंदाैर नहीं पहुंच जाता तब तक उन्हें अस्पताल में ही रहना पड़ता है। इसके इतर मनीषा बच्चाें काे चाय, नाश्ता अपनी जेब से कराती हैं। वे बताती हैं कि वे बच्चाें काे भूख से तड़पता नहीं देख सकती। 

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11 नर्साें ने अतिरिक्त ड्यूटी कर व्यवस्था संभाली
एसएनसीयू की 19 नर्साें की सैंपलिंग हाेने से यहां की व्यवस्था चरमरा गई थी। एेसी स्थिति में पीआईसीयू वार्ड की 11 नर्साें ने अतिरिक्त ड्यूटी कर व्यवस्था संभाले रखी। इनमें रीना आचले, बबीता मंडलाेई, काजल पांडे, खुशबू मालवीय, रागिनी उईके, शिष्टा वर्मा, रामकन्या चाैहान, कविता मेहता, वंदना आर्य, मनीषा एसके, शिक्षा वर्मा हैं। पीअाईसीयू वार्ड की रीना आचले ने बताया पीअाईसीयू में 29 दिन से लेकर 12 साल के गंभीर बच्चाें काे भर्ती किया जाता है। जबकि एसएनसीयू में एक दिन से लेकर 29 दिन तक के बच्चाें काे भर्ती किया जाता है। 12 घंटे ड्यूटी की ताकि व्यवस्था बनी रहे।

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