इटली के 14 कोरोना मरीजों का इलाज करने वाली इस डॉक्टर के बारे में जानते हैं आप?

By Abhishek Raghuvanshi
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डॉ. सुशीला ने 18 दिनों तक परिवार से बिल्कुल अलग रहकर इटैलिय मरीजों को ठीक किया है.

14 मरीजों में से एक को डिस्चार्ज किया जा चुका है जबकि 13 को टेस्ट निगेटिव आने के बाद भी ऑब्जर्वेशन में रखा गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने देश के लोगों से अपील की है कि 22 मार्च शाम 5 बजे तालियां बजाकर कोरोना (Corona Virus) के खिलाफ जंग लड़ रहे मेडिकलकर्मियों (Medical Staff) का सम्मान करें. पीएम की इस अपील का असर हुआ. 22 मार्च से एक दिन पहले यानी 21 मार्च को भी लोगों ने अपने घरों से तालियां, शंख, थालियां बजाकर डॉक्टरों को सैल्यूट किया है. दरअसल कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लोग जब डरे हुए हैं तब डॉक्टर दुनियाभर में दिन-रात सेवा में लगे हुए हैं. कई देशों में डॉक्टर लोगों का इलाज करते-करते अपनी जान गंवा चुके हैं.

18 दिनों से परिवार से नहीं मिलीं सुशीला कटारिया
कोरोना के खिलाफ मरीजों को ठीक करने में जुटीं ऐसी ही एक डॉक्टर हैं सुशीला कटारिया. सुशील कटारिया वो डॉक्टर हैं जिन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 14 इटैलियन मरीजों के इलाज के जिम्मेदारी मिली है. इन 14 मरीजों के कोरोना संक्रमण का पता राजस्थान में चला था. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते 4 मार्च को मेदांता अस्पताल को प्रशासन द्वार जानकारी दी गई कि ये 14 मरीज आपके यहां भेजे जा रहे हैं. जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन ने नया वार्ड बनाया, नई टीम बनाई और इस टीम का हेड बनाया गया डॉक्टर सुशीला कटारिया को.

सभी मरीज थे उम्रदराज
अस्पताल के लिए चिंताजनक बात ये थी कि ये सभी मरीज 65 साल की उम्र से ज्यादा के थे. गौरतलब है कि कोरोना के मामले में ज्यादातर मौतें उम्रदराज लोगों की ही हो रही हैं. मामला विदेशी नागरिकों का होने की वजह से और भी संवेदनशील था.

सुशीला कटारिया ने इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट में बताया है कि हम सभी के लिए ये बिल्कुल नया था. क्योंकि हमने इससे पहले ऐसा कोई केस डील नहीं किया था. लेकिन हम लोग मेडिकल के प्रोफेशन में है और नई जिम्मेदारियां से किनारा नहीं कर सकते. मेरा काम है लोगों की सेवा करना और मैं इसमें हिचकिचाती नहीं.

अस्पताल में ही गुजारती हैं ज्यादातर समय
बीते 18 दिनों से सुशीला कटारिया अपना ज्यादातर समय अस्पताल में ही गुजारती हैं. डॉ. सुशीला ने बताया कि उनके पति को इन्फ्लेमेटरी आर्थराइटिस की प्रॉब्लम है. वो घर से दूर गुरुग्राम में ही एक अलग जगह शिफ्ट हो गए हैं. दोनों 18 दिनों से मिले नहीं हैं लेकिन व्हाट्सअप और कॉल के जरिए एक दूसरे से कनेक्टेड रहते हैं.

घर में भी रहती हैं आइसोलेटेड
जहां सुशीला के पति रहने के लिए अलग जगह शिफ्ट हो गए हैं वहीं उनके बेटे और बेटी अभी घर में ही रहते हैं. सुशीला अपने घर के जिस कमरे में रहती हैं उसका एंट्री और एक्जिट बिल्कुल अलग है. एक ही घर में रहने के बावजूद वो अपने बेटे-बेटी से नहीं मिलती हैं. सुशीला कहती हैं कि हम एक घर में भले रहते हैं लेकिन ऐसा लगता है जैसे हम अलग-अलग घरों में रह रहे हैं. सुशीला ने घर के सभी लोगों से खुद को अभी अलग कर रखा है.

बीते शनिवार को 14 इटैलियन मरीजों में से एक को डिस्चार्ज कर दिया गया है. उनकी उम्र 68 साल थी. बाकी के 13 मरीजों के टेस्ट भी निगेटिव आए हैं. लेकिन उन्हें अभी भी ऑब्जर्वेशन में रखा गया है.

डॉ. सुशीला कटारिया मेदांता अस्पताल में साल 2010 से काम कर रही हैं. मेदांता में सुशीला डायरेक्टर ऑफ इंटरनल मेडिसिन हैं. साल 2015 में जब मुलायम सिंह यादव को मेदांता भर्ती कराया गया था तब भी डॉ. सुशीला ने उस मामले की मॉनिटरिंग की थी.
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First published: March 22, 2020, 2:55 PM IST

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