लॉकडाउन: केंद्र ने दिल्ली सरकार के दो अधिकारियों को किया निलंबित

By Abhishek Raghuvanshi
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नई दिल्ली. केंद्र ने कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) को फैलने से रोकने के लिए किए गए बंद के दौरान कर्तव्य के निर्वहन में ‘‘गंभीर चूक’’ के कारण दिल्ली सरकार (Delhi Government) के दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया और दो अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किए.

गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के एक प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार (Delhi Government) के जिन दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है, वे अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) और प्रधान सचिव (वित्त) हैं. जिन दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, वे अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और एसडीएम सीलमपुर हैं.

लापरवाही के चलते की गई कार्रवाई
प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र सरकार (Central Government) ने कोविड-19 (Covid-19) को फैलने से रोकने के संबंध में कर्तव्य का पालन करने में लापरवाही के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार (Delhi Government) के चार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है.  उसने बताया कि आपदा प्रबंधन कानून 2005 के तहत गठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के अध्यक्ष के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार ये अधिकारी ऐसा करने में प्रथमदृष्टया असफल रहे.

उल्लेखनीय है कि बंद की घोषणा के बाद से दिल्ली से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का पलायन हुआ है.

केंद्र ने राज्यों की सीमा सील करने के दिए आदेश
इससे पहले केंद्र ने रविवार को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनों से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (बंद) के दौरान प्रवासी कामगारों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी तरीके से राज्य और जिलों की सीमा सील करने को कहा. लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले लोगों को 14 दिन के लिए पृथक केंद्र भेजा जाएगा.

मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा कि शहरों में या राजमार्गों पर आवाजाही नहीं हो क्योंकि बंद जारी है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी कामगारों की आवाजाही हो रही है. निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्यों और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करना चाहिए.’’

राजमार्गों और शहरों से सामानों को ले जाने की अनुमति
राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि शहरों में या राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही नहीं हो. केवल सामान को लाने-ले जाने की अनुमति होनी चाहिए. सरकारी बयान में कहा गया कि बंद का उल्लंघन करने वालों और इस अवधि में यात्रा करने वालों को सरकारी पृथक केंद्र में 14 दिन के लिए भेज दिया जाएगा.

बाद में, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बंद का उल्लंघन करने वाले और इस दौरान यात्रा करने वाले प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थानों पर 14 दिनों के लिए पृथक केंद्र में रखा जाएगा.

गृह मंत्रालय ने रविवार को जारी आदेश में अपने-अपने गृह राज्यों/गृहनगरों की ओर निकले प्रवासी मजदूरों को गंतव्य पर पहुंचने पर 14 दिनों के लिए पृथक तौर पर रखने को कहा है. आधिकारिक बयान में सरकार ने कहा है कि इन निर्देशों का पालन करवाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की निजी तौर पर जिम्मेदारी बनती है.

अधिकरियों को दिए गए ये आदेश
केंद्र सरकार के दोनों आला अधिकारियों ने सभी राज्यों के पुलिस और प्रशासन के प्रमुखों से प्रवासी कामगारों सहित जरूरतमंद और गरीब लोगों को खाना और आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम करने को कहा.

राज्यों से बंद के दौरान मजदूरों को उनके कार्यस्थल पर बिना किसी कटौती के समय पर वेतन भगुतान करने के लिए भी सुनिश्चित करने को कहा गया है. बयान में कहा गया कि इस अवधि में मजदूरों से किराया नहीं मांगना चाहिए. मजदूरों या छात्रों से जो लोग परिसर खाली करने को कहेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. बयान में कहा गया, ‘‘सभी राज्यों को कहा गया है कि कोरोना वायरस के प्रसार पर रोक लगाने के लिए तीन सप्ताह कड़ाई करना जरूरी है. यह हर किसी के हित में है.’’

पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर पैदल ही मुश्किल भरा सफर तय करते हुए अपने घरों की ओर निकले हैं. राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद परिवहन का कोई साधन नहीं रहने के कारण पैदल जाने के अलावा मजदूरों के पास कोई चारा नहीं रह गया. आखिरकार, मजदूरों की दुर्दशा देखकर कुछ राज्य सरकारों ने उनकी यात्रा, भोजन आदि की व्यवस्था की.

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