डॉ. कफील की पत्‍नी का HC से अपील- आदेश के बाद भी उनके पति को नहीं मिली रिहाई

By Abhishek Raghuvanshi
4 Min Read
डॉ. कफील खान की पत्‍नी का हाईकोर्ट से अपील (file photo)

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्यों को एक अहम निर्देश दिया था कि सात साल से कम की सज़ा पाए या सात साल से कम की सज़ा के आरोपों में जेल में बंद अंडर ट्रायल व 65 साल से ऊपर की उम्र के कैदियों को छोड़ दिया जाए.

मथुरा. भारत में कोराना वायरस (Coronavirus) के लगातार बढ़ रहे खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर योगी सरकार ने 11 हजार बंदियों को जेल से छोड़ने के निर्देश दिए हैं. इसी कड़ी में सोमवार को मथुरा जिला जेल में बंद डॉक्टर कफील खान (Dr. Kafeel Khan) की पत्नी शबिस्ता खान ने यूपी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. शबिस्ता खान ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद डॉ. कफील खान को भी मथुरा जेल से रिहा किया जाना था. उनका भी नाम जेल की लिस्ट में शासन को गया था. उन्होंने कहा कि 28 मार्च 2020 को सुबह उनकी रिहाई का ऑर्डर भी आ गया था.

शबिस्ता खान का आरोप है कि रिहाई के कुछ घंटों पहले लखनऊ से किसी अधिकारी का फोन आने पर उनकी रिहाई रोक दी गई. उन्होंने बताया कि मेरे पति डॉक्टर कफील ने जेल पीसीओ से मुझे फोन करके जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मैं माननीय उच्च न्यायालय से प्रार्थना करती हूं मेरे पति डॉक्टर कफील को रिहा किया जाए. क्योकि इनकी सेहत भी ठीक नहीं हैं.

डॉ. कफील खान की पत्‍नी शबिस्ता खान

इससे पहले निलंबित बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. दरअसल, इस चिट्ठी में डॉ. कफील ने पीएम मोदी से अनुरोध किया है कि भारतीयों को कोरोना जैसी घातक महामारी से बचाने के लिए Corona Stage-3 के खिलाफ एक रोड मैप का जिक्र किया था.उन्होंने पीएम मोदी को चिट्ठी में लिखा, ’20 वर्ष के अनुभव के आधार पर Corona Stage-3 के खिलाफ कैसे लड़ा जाए, उसका रोड मैप आपको देना चाहता हूं. जिससे इस महामारी से फैलते संक्रमण पर अंकुश लगाया जा सके.’

फिलहाल 8 हफ्ते के लिए छोड़े जाएंगे बंदी

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्यों को एक अहम निर्देश दिया था कि सात साल से कम की सज़ा पाए या सात साल से कम की सज़ा के आरोपों में जेल में बंद अंडर ट्रायल (Under Trial) कैदी (Prisoner) व 65 साल से ऊपर की उम्र के कैदियों को नियमों व शर्तों के दायरे में रहते हुए छोड़ दिया जाए. निर्देश के मुताबिक सभी राज्य सरकारों को एक उच्च शक्ति समिति का गठन करने को कहा गया था जो यह निर्धारित करेगी कि किन कैदियों/अपराधियों को इन हालातों में सशर्त जमानत (Conditional bail) दी जा सकती है.

ये भी पढ़ें:

Lockdown: अफवाह फैलाने के आरोप में इलाहाबाद विवि की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह पर केस दर्ज

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 30, 2020, 9:14 AM IST

Exit mobile version