कोरोना वायरस: पेड़ के ऊपर खुद को क्वारंटाइन कर रहे हैं ये 7 आदिवासी युवा

By Abhishek Raghuvanshi
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पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में सात आदिवासी युवा खुद को पेड़ के ऊपर क्वारंटाइन कर रहे हैं (वीडियो ग्रैब)

ये कामगार 24 मार्च को मोटर पार्ट (Motor Part) बनाने वाली चेन्नई (Chennai) की कंपनी की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट (manufacturing unit) के लॉकडाउन (Lockdown) के चलते बंद होने के बाद अपने घर वापस लौटे थे.

पुरुलिया, प. बंगाल. सात आदिवासी युवा (Tribal Youths) जो चेन्नई (Chennai) में प्रवासी कामगार (migrant Workers) हैं. पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पुरुलिया जिले (Purulia District) के बलरामपुर पीएस इलाके में अपने गांव के बाहर पेड़ के ऊपर क्वारंटाइन की प्रैक्टिस कर रहे हैं.

ये कामगार 24 मार्च को मोटर पार्ट (Motor Part) बनाने वाली चेन्नई (Chennai) की कंपनी की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट (manufacturing unit) के लॉकडाउन (Lockdown) के चलते बंद होने के बाद अपने घर वापस लौटे थे.

गांव वालों ने दी गांव से बाहर पेड़ पर क्वारंटाइन का समय गुजारने की सलाह
आते ही, उन्होंने बलरामपुर ग्रामीण हेल्थ सेंटर में अपना मेडिकल चेकअप (Medical Checkup) कराया, जहां डॉक्टर ने उन्हें 14 दिन क्वॉरंटाइन में गुजारने की सलाह दी.प्रभावकारी क्वॉरंटाइन (effective quarantine) के लिए अपने गांव के घरों में जगह की कमी को देखते हुए इन 7 कामगारों को गांव वालों ने गांव के बाहर पेड़ के ऊपर रहने की सलाह दी. जिसका ये युवा 14 दिन तक पालन करने के लिए तैयार हो गए.

गांव वाले पेड़ के नीचे रख जाते हैं खाना, जिसे नीचे उतरकर ले आते हैं ये कामगार
गांव वालों ने पेड़ की डालों के ऊपर लकड़ी का प्लेटफार्म (Wooden Platform) बनाने में उनकी मदद की, जहां अब वे रात गुजार रहे हैं.

गांव वाले (Villagers) और परिवार वाले उनके लिए खाने का प्रबंध कर रहे हैं. इस खाने को वे पेड़ के नीचे रखकर चले जाते हैं. ये कामगार, गांव वालों के जाने के बाद नीचे आते हैं और अपना खाना लेकर ऊपर चले जाते हैं.

अस्थायी क्वॉरंटाइन छप्पर बनाकर उसमें शिफ्ट करने की कोशिश कर रहा स्थानीय ग्राम प्रशासन
इन कामगारों का कहना है कि वे सारे ही बताए गए सुरक्षा नियमों को मान रहे हैं ताकि कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके. हालांकि उन्हें कोरोना पॉजिटिव (Positive) नहीं पाया गया है.

स्थानीय पंचायत प्रशासन (Local panchayat authorities) ने कहा है कि कोशिश की जा रही है कि उन्हें पेड़ से नीचे लाया जा सके और गांव में एक अस्थायी क्वारंटाइन छप्पर बनाकर उसमें रखा जा सके.

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First published: March 28, 2020, 8:48 PM IST

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