कार्बन क्रेडिट के माध्यम से स्वच्छ शहरों में पहले स्थान पर मौजूद इंदौर नगर निगम द्वारा अपनी आय का नया तरीका खोजा

By Abhishek Raghuvanshi
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आर्थिक तंगी से झुंझ रहे इंदौर नगर निगम ने अपनी आय का नया जरिया खोज लिया है। इस नए तरीके से निगम को एक या दो साल नहीं, बल्कि आने वाले 30 सालों तक कम से कम हर साल 50 लाख की वार्षिक आय होगी।इस अनूठी पहल के साथ देश के सबसे स्वच्छ शहरों में पहले स्थान पर मौजूद इंदौर ने एक बार फिर देश के नक्शे पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इस बार कार्बन क्रेडिट को बेचकर इंदौर देश के अग्रणी शहरों में मिसाल पेश कर रहा है। दरअसल इंदौर की आईएएस अदिति गर्ग ने कार्बन क्रेडिट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ना सिर्फ बेचा, बल्कि उससे 50 लाख की आय भी अर्जित की है, जिसके चलते वह देश की पहली ऐसी आईएएस बन चुकी है, जिन्होंने कार्बन क्रेडिट के माध्यम से 50 लाख रुपये की आय अर्जित की है। आईएएस अदिति गर्ग की मानें तो गीले कचरे से निकलने वाली मीथेन गैस में सामान्य से 24 गुना ज्यादा कार्बन कंपोनेंट होते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। इंदौर में बायो मिथेनाइजेशन प्लांट लगने से जो प्रदूषण फैल रहा था, वह कम हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से इसकी गणना के बाद शहर को कार्बन क्रेडिट मिला है। इंदौर ने 2017 से 2019 तक 1.70 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड को वातावरण में घुलने से रोका है। आईएएस अदिति गर्ग का कहना है कि कार्बन क्रेडिट को लेकर इंदौर के सामने भी कई चुनौतियां थी, लेकिन उन चुनौतियों को पूरा कर दिखाया है और अब देश के दूसरे शहर इंदौर से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की कला सीखने की मांग कर रहे हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के मुताबिक तैयार किया जा सके और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचा जा सके। कार्बन क्रेडिट को तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के साथ इंदौर ने यह साबित कर दिया है कि वह ना सिर्फ पर्यावरण का संरक्षण करेगा, बल्कि कार्बन क्रेडिट के माध्यम से आने वाले दिनों में करोड़ों रुपए की आय भी अर्जित करेगा।

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